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ASHOKMAHAWAR

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भोलेनाथ से सीखा है मेने शांत रहना जिस दिन सब्र टूटा तो तांडव ही होगा ॥   सबसे बेहतरीन ऩजर वो है ....जो अपनी कमियो को देख सके ॥ मम प्रिय अनुज: -किरणपाल: 05-03-2020 गुरुवासर: 

अशोक कुमार

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न जाने कौनसी दौलत है कुछ लोगो के शब्दो मे ।              बात करते है तो मन ही खरीद लेते है॥ , , , , , , , । । । । । , , , , , , , । । । । । , , , , , ,     दिल के रिश्ते हमेशा किस्मत से ही बनते है ।     वरना मुलाकात तो रोज हजारो से होती है ॥ :::::::::::::::::::::::::::::!!!!!!!!::::::::::::::::::::::::       ॥ मेरा भाई है रोहित ..मेरी जान है रोहित ॥                     ROHIT KUMAR........             ASHOK KUMAR......   देश की रक्षा धर्म हमारा देश की सेवा कर्म हमारा !                     । भारत माता की जय ।                               ❤ 🙏 दिनांक: 03-03-2020 मंगलवार संघ कार्यालय,बगरू लाल कोठी

MY BEST BROTHERS. TARUN JI , DHEERAJ JI, ROHIT JI

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मम प्रिय मित्राणि ..तरुण: , धीरज:, रोहित: । मकर संक्रांति पर्वणि मित्र रोहितस्य गृहे भोजनम् अकुर्वन् । आंनदस्य दिवसंं आसीत्। ऐतत् दिनंं तु अविस्मरणीय अस्ति । जय श्री राम:🙏                          ।.....निःस्वार्थ प्रेम .....। जब भी प्रेम की बात आती हे, हम सबसे पहले मन मे एक नायिका और एक नायक का चित्रण कर लेते हे । क्यों आपके साथ भी यही होता हे ना, पर क्या प्रेम केवल नायक-नायिका के आकर्षण का बंधन हे , नही, प्रेम तो परिवार से हॊ सकता हे , माता-पिता भाई-बहिन से हॊ सकता हे , सखा -मित्रो से हॊ सकता हे , देश और जन्मभूमि से हॊ सकता हे , मानवता के लिए हॊ सकता हे,  किसी कला के लिए हॊ सकता हे। इस प्रकृति के लिए हॊ सकता हे । परंतु प्रेम उस पन्ने पर लिखा ही नही जा सकता जिस पर पहले ही बहुत कुछ लिखा जा चुका हे । जेसे एक भरी मटकी मे और जल आ ही नही सकता ! यदि प्रेम को पाना हे तो मन को खाली करना होगा । अपनी इच्छाए अपना सुख सब त्याग कर समर्पण करना होगा । अपने मन से व्यापार हटाये तभी प्यार बढ़ेगा । और तब मन प्रफुल्लित होकर बोलेगा ...

MY BEST BROTHER ROHIT JI BAGRU

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जीवन मे समय चाहे जैसा भी हो, अपनो का साथ बड़ा आवश्यक होता हे!सुख हो तो बढ़ जाता हें और दुख हो तो बट जाता हें । अपनो क़े साथ समय कब बीत जाता हें पता ही नही चलता। किन्तु सोचिए यदि आपको किसी ऐसे स्थान पर छोड़ दिया जाए , जन्हा आपका कोई संबन्धी ना हो , आपका कोई अपना ना हो , कोई मित्र ना हो , तो क्या होगा । एक-एक क्षण कितना लंबा लगने लगेगा ना । तब तक लगेगा जब तक आप किसी को अपना नही बना लेते । अब प्रश्न यह उठता हें कि आपका अपना कौन हें ? वे सम्बन्धी जिनके साथ आप रक्त के साथ जुड़े हें ! या वे मित्र जिनके साथ आप बालपन से पले-बढ़े हें ! या वे सहकर्मी जिनके साथ आप काम करते हें ! नही ..अपना वो जो विपत्ति मे काम आए ! अपनो की परख समय की कसौटी पर की जाती हें ! स्मरण रखिएगा ...अपनो के साथ समय का पता नही चलता, किन्तु समय के साथ अपनो का पता अवश्य चलता हें ॥ राधे राधे ...🙏 दिनांक- 16-01-2020 स्थान- बगरू ॥ रोहित कुमार ॥ अशोक कुमार ॥ अद्य मम जीवनस्य अतिमहत्वपूर्ण दिनम् अस्ति । 

MY BEST BROTHER ROHIT JI BAGRU

कुमार अशोक

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जीवन मे आपको कई सारे लोग मिलेंगे , बड़ी मीठी-मीठी बाते करेंगे, परंतु यदि आपके जीवन मे कोई ऐसा आए जो आपके हित क़े विषय मे सोचता हें , तो उन्हें कंही ना जाने दे, उन्हें सहज कर रखे !  आदरणीय मुकेश जी भाईसाब  आप सदृश भ्राता दुर्लभ हें ..आपने सदैव मेरा ध्यान रखा ,  मुझे सुपथ दर्शन कराये , आप मेरे लिए अवतार हो , जीवन धन्य हो गया मेरा आप सम भाई मिला  ! 🙏 ❤  मै आपका सदैव ऋणी रहूंगा !🙏  ज्ञान या अज्ञान मे मुझसे यदि कोई  गलती हो गई हो तो क्षमाप्रार्थी हु ! 🙏  ईश्वर से यही प्रार्थना करता हु ..कि आप सदैव ईश्वरीय कार्य करते रहे ., आप सदैव प्रफुल्लित रहे , सुखमय जीवन जिए !                             प्रणिपात मम प्रिय अग्रज:

मेरी हार देश की जय हो ।

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मैं अशोक कुमार राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ- बगरूखंड विस्तारक आज दिनांक 28-08-19 को प्रतिज्ञा करता हूं कि मैं आजन्म माँ भारती की सेवा करूंगा। यह मेरी मातृभूमि हे और मैं इसका पुत्र हिंदू हूं । यह मेरा शरीर नही हे ,स्वयं को राष्ट्र कार्य के लिये तिल-तिल कर आहूत कर दूंगा । मेरी एक ही अभिलाष हे कि मेरा प्रत्येक जन्म इस पुण्यभूमि, कर्मभूमि , इस पवित्र देवभूमि भारतभूमि पर जन्म हो । इस हिंदूभूमि के रजकणों से पुनीत होना चाहता हूं । संघ कार्य ईश्वरीय कार्य हे , मैं भी इस ईश्वरीय कार्य मे स्वंय को खपाना चाहता हूं । आज मैं समाज मैं जो कुछ भी हूं , अपने गुरु परम पवित्र भगवा ध्वज के दैव से हूं । गुरु के आशीर्वाद के बिना मैं अकिंचन हूं । मेरी हार देश की जय हो, यही भाव अपने अन्तःकरण मे स्थापित करके मैं आजन्म ब्र्ह्मचर्य पालन  करने का व्रत लेता हूं । आज का दिन मेरे जीवन का स्वर्णिम नवजीवन हे ।                               '  त्वदीयाय कार्याय बद्धा कटीयम्् '                  ...