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कुमार अशोक

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मातृ मंदिर का समर्पित दीप मैं💐💐🏵🏵🌻🌻🙏

KUMAR ASHOK

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 मृगेन्द्रता ... शीलंं परं भूषणंं...🙏🙏       हम युवा है हम करें मुश्किलों से सामना  मातृ भू हित जगे है हमारी कामना ॥        💗💗💗💗💗💗💗💗💗💗💗 प्रिय वाक्य प्रदानेन सर्वे तुष्यन्ति जन्तव: । तस्माद्तदेव वक्तव्यंं वचने का दरिद्रता ॥  🌻🌼🌸🌹🍀🍁🌺🌻🌼🌸🌹🍀🍁🌺  प्रिय मधुर वचन बोलने से सभी प्राणी सतुष्ट होते है ,इसलिए  मधुर वचन बोलने में कैसी दरिद्रता ? 🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁    दिनांक-14-08-2020 समय 04:00  प्रात:    पूर्व दिनांक-6-08-2020                    🌻  जय श्री राम 🌻

कुमार रोहित

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यदि हम अपनी अपेक्षाओं पर नियंत्रण पा ले । किसी और के सुख की तुलना अपने सुख से ना करे । तो हम किसी भी परिस्थिति मे सुखी रह सकते हे । संसार मे सबसे शक्तिशाली अस्त्र हे प्रेम-धैर्य-करुणा-क्षमा । किन्तु ये आजका ही सत्य नही ये सत्य शाश्वत हे ॥  मम परं मित्र रोहित जी । त्वंसि मे हृदयं द्वितीयं॥ 

कुमार अशोक

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क्या संसार मे कोई भी शब्द निरर्थक हे । क्या कोई ऐसी जड़ी-बूटी हे जो रोग का निवारण ना करे । नही ..! ठीक इसी प्रकार इस संसार मे कुछ भी अयोग्य या निरर्थक नही होता।हर का प्राणी हर एक वस्तु हर एक घटना का एक महत्व होता हे । एक आवश्यकता होती हे ।परन्तु बड़ा वो निरिक्षक होता हे जो उन्हे पहचानता हे । जैसे कि एक ज्ञानी शब्दो की शक्ति को पहचानता हे । जैसे कि एक वैद्य किसी बूटी मे छिपे उसके गुणों को पहचानता हे । जैसे कि एक जौहरी कोयले मे छिपे हीरे को पहचानता हे । इन सब बातों का सत्व ये हे कि यदि आपको श्रेष्ठ होना हे तो कमियां देखना छोड़ीये और गुण और विशेषताये देखिये । आपका जीवन सफल और सरल हो जाएगा । 

ASHOKMAHAWAR

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भोलेनाथ से सीखा है मेने शांत रहना जिस दिन सब्र टूटा तो तांडव ही होगा ॥   सबसे बेहतरीन ऩजर वो है ....जो अपनी कमियो को देख सके ॥ मम प्रिय अनुज: -किरणपाल: 05-03-2020 गुरुवासर: 

अशोक कुमार

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न जाने कौनसी दौलत है कुछ लोगो के शब्दो मे ।              बात करते है तो मन ही खरीद लेते है॥ , , , , , , , । । । । । , , , , , , , । । । । । , , , , , ,     दिल के रिश्ते हमेशा किस्मत से ही बनते है ।     वरना मुलाकात तो रोज हजारो से होती है ॥ :::::::::::::::::::::::::::::!!!!!!!!::::::::::::::::::::::::       ॥ मेरा भाई है रोहित ..मेरी जान है रोहित ॥                     ROHIT KUMAR........             ASHOK KUMAR......   देश की रक्षा धर्म हमारा देश की सेवा कर्म हमारा !                     । भारत माता की जय ।                               ❤ 🙏 दिनांक: 03-03-2020 मंगलवार संघ कार्यालय,बगरू लाल कोठी

MY BEST BROTHERS. TARUN JI , DHEERAJ JI, ROHIT JI

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मम प्रिय मित्राणि ..तरुण: , धीरज:, रोहित: । मकर संक्रांति पर्वणि मित्र रोहितस्य गृहे भोजनम् अकुर्वन् । आंनदस्य दिवसंं आसीत्। ऐतत् दिनंं तु अविस्मरणीय अस्ति । जय श्री राम:🙏                          ।.....निःस्वार्थ प्रेम .....। जब भी प्रेम की बात आती हे, हम सबसे पहले मन मे एक नायिका और एक नायक का चित्रण कर लेते हे । क्यों आपके साथ भी यही होता हे ना, पर क्या प्रेम केवल नायक-नायिका के आकर्षण का बंधन हे , नही, प्रेम तो परिवार से हॊ सकता हे , माता-पिता भाई-बहिन से हॊ सकता हे , सखा -मित्रो से हॊ सकता हे , देश और जन्मभूमि से हॊ सकता हे , मानवता के लिए हॊ सकता हे,  किसी कला के लिए हॊ सकता हे। इस प्रकृति के लिए हॊ सकता हे । परंतु प्रेम उस पन्ने पर लिखा ही नही जा सकता जिस पर पहले ही बहुत कुछ लिखा जा चुका हे । जेसे एक भरी मटकी मे और जल आ ही नही सकता ! यदि प्रेम को पाना हे तो मन को खाली करना होगा । अपनी इच्छाए अपना सुख सब त्याग कर समर्पण करना होगा । अपने मन से व्यापार हटाये तभी प्यार बढ़ेगा । और तब मन प्रफुल्लित होकर बोलेगा ...